वैज्ञानिक सर नोसल ने ऑस्ट्रेलिया में स्कूल की स्थापना कर शिक्षा का दीप जलाया

धन्य हैं नोसल और उनकी जैसी सोच के महान लोग
मेलबर्न (एसपी चौहान)
मुझे मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया के एक नोसल हाई स्कूल में जाने और समझने का मौका मिला। इसके संस्थापक Sir Gustuv nossal थे ,जो एक वैज्ञानिक थे तथा द्वितीय विश्व युद्ध में ऑस्ट्रिया से हिटलर के अत्याचार से परेशान होकर यहां आकर शरण पाए थे।
      यह स्कूल एजुकेशन हब समझे जाने वाले विक्टोरिया में स्थित है। मैंने वहां के कुछ शिक्षकों से बात की। मैं अपने बेटे जय के साथ पेरेंट्स टीचर मीटिंग में गया था। यहां मेरा बड़ा पौत्र यश कक्षा 11 का छात्र है। जो देखा वह लिख रहा हूं। यहां ओपन क्लासें होती हैं, एक क्लास में 20 से 25 छात्र होते हैं। सबसे ज्यादा खुशी की बात मुझे यह दिखाई दी कि यहां भारतीय, श्रीलंका, चीन,कोरिया, बांग्लादेश पाकिस्तान के छात्र -छात्राओं की संख्या काफी अधिक थी। जिनमें चीन और भारत के सबसे ज्यादा थे। यह सरकारी स्कूल है जिसमें एडमिशन के लिए ऑस्ट्रेलिया के सबसे मेधावी छात्र ही परीक्षा पास कर पाते हैं। यह चार विद्यालय हैं जिनमें दो विद्यालय कोएजुकेशन के हैं एक में केवल लड़कियां और चौथे में लड़के ही पढ़ते हैं। एडमिशन के तरीके के बारे में मुझे पता चला कि यहां एडमिशन के लिए करीब 30000 छात्र-छात्राएं टेस्ट देते हैं जिनमें केवल 800 छात्र ही एडमिशन के पात्र होते हैं। बाकी पीछे रह जाते हैं। कॉलेज में जिम,बास्केटबॉल, टेनिस कोर्ट्स , बास्केटबॉल कोर्ट्स, क्रिकेट व फुटवाल आदि के मैदान दो मंजिला लाइब्रेरी है। कोई शोर नहीं शांत और सुंदर वातावरण। नीचे फोटो में स्कूल के संस्थापक सर नोसल हैं जिनकी मूर्ति के पास मुझे बैठने का सौभाग्य मिला। धन्य हैं सर नोसल और उनके जैसी सोच के लोग।

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