डीएलएफ स्कूल साहिबाबाद में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए वैश्विक सम्मेलन
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए संवेदनशील संवाद जरूरी : डीएलएफ पब्लिक स्कूल में वैश्विक शिखर सम्मेलन में मंथन
बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए उनकी भावनाओं को समझना, खुलकर संवाद करना और समय रहते उचित सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है। इसी उद्देश्य से डीएलएफ पब्लिक स्कूल में 10 और 11 अक्टूबर को विद्यार्थी मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण पर दो दिवसीय वैश्विक शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया।
यह आयोजन इंडियन एसोसिएशन ऑफ मेंटल हेल्थ प्रैक्टिशनर्स (आईपीएचएएस) और यूनिक साइकोलॉजिकल सर्विसेज (यूपीएस) के सहयोग से आयोजित हुआ,सम्मेलन में शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं और परामर्शदाताओं ने विद्यार्थियों के मानसिक एवं भावनात्मक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
सम्मेलन में चिंता, बुलिंग यानी सहपाठियों द्वारा परेशान किए जाने, आत्महानि और आत्महत्या की रोकथाम, सोशल मीडिया की लत, लैंगिक पहचान, मादक पदार्थों के सेवन और जोखिमपूर्ण व्यवहार जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों के व्यवहार में होने वाले बदलावों को गंभीरता से समझना और उन्हें बिना किसी डर या संकोच के अपनी बात रखने का अवसर देना आवश्यक है।
कार्यक्रम में सीबीएसई के प्रशिक्षण एवं कौशल शिक्षा निदेशक डॉ. बिस्वजीत साह, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव सिबिन सी. तथा निमहांस, बेंगलुरु के डॉ. शेखर शेषाद्रि सहित कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल हुए। डॉ. बिस्वजीत साह ने कहा कि शिक्षा और कौशल विकास के साथ विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को भी समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वहीं, सिबिन सी. ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने में सरकारी पहलों, हेल्पलाइन और सहायता प्रणालियों की भूमिका पर प्रकाश डाला।
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती सीमा जेरथ ने कहा कि बच्चों की मानसिक परेशानी को पहचानना पहला कदम है, लेकिन सही समय पर उचित सहायता देना निर्णायक होता है। प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान में ऐसी प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को जरूरत पड़ने पर सहजता से मदद मिल सके।
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